Thursday, February 16, 2006

कोई फरियाद तेरे दिल मेँ दबी हो जैसे

जगजीत सिहं जी कि गजले मुझे बहुत पसन्द है। गजल का पूरा आनन्द तभी मिलता है जब गजल पूरी तरह से समझ मे आऍ। गजलों को लोगो के करीब लाने मे जगजीत सिहं का काफी योगदान है। आवश्यकता पडने पर उन्होंने गजलों मे थोडा परिवर्तन करना अनुचित नही समझा । मेरे ख्याल से यह बहुत ही महत्वपूर्ण बात थी जो गजल कौ जन मानस के करीब लायी । पेश है जगजीत सिहं कि ऍक गजल फिल्म तुम बिन से ।

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कोई फरियाद तेरे दिल मेँ दबी हो जैसे ।
तूने आखो से कोई बात कही हो जैसे ।।

ऍक लम्हे मेँ सिमट आया है सदियौ का सफर ।
जिन्दगी तेज बहुत तेज चली हो जैसे ।।

हर मुलाकात मेँ महसूस यही होता है ।
मुझसे यह तेरी नजर, कुछ पूछ रही हो जैसे।।

क्या तुझे दे दूँ यही सोचता रहता हूँ मै ।
मेरी हर साँस तेरे नाम लिखी हो जैसे।।

जागते॑ - जागते ऍक उम्र कटी हो जैसे ।
जान बाकी है मगर साँस रुकी हो जैसे।।

कोई फरियाद तेरे दिल मेँ दबी हो जैसे ।
तूने आखो से कोई बात कही हो जैसे ।।
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6 Comments:

At 4:45 PM, Blogger Tarun said...

स्‍वागत है राहुल कचरा डालने के लिये, लेकिन अपनी गंदगी खुद उठाने को तैयार रहना। जगजीत सिंह अपने भी पसंदीदा गजल गायकों में से हैं।

 
At 3:13 AM, Blogger चितराला said...

एक सुधार, अगर बुरा न लगे तो........
तीसरा व चौथा शेर इस प्रकार है:
राह चलते हुए महसूस यही होता है । वो नजर, छुप के मुझे देख रही हो जैसे।।
इस तरह पहरों तुझे सोचता रहता हूँ मै ।
मेरी हर साँस तेरे नाम लिखी हो जैसे।।

 
At 6:40 AM, Blogger Manish said...

जगजीत जी की तो बात ही निराली है!

 
At 5:03 PM, Blogger shawntheobold28035398 said...

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At 9:36 AM, Blogger Amarjeet Singh said...

जगजीत सिह पर एक वेबसाईट http://jagjitsingh.imess.net/

 
At 2:55 AM, Blogger Nishikant Tiwari said...

लहर नई है अब सागर में
रोमांच नया हर एक पहर में
पहुँचाएंगे घर घर में
दुनिया के हर गली शहर में
देना है हिन्दी को नई पहचान
जो भी पढ़े यही कहे
भारत देश महान भारत देश महान ।
NishikantWorld

 

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